बुधवार, 9 जुलाई 2025

अरहर की खेती कैसे करें – पूरी जानकारी, लाभ, बीज, सिंचाई और लागत


अरहर की खेती कैसे करें – पूरी जानकारी

परिचय

अरहर जिसे तुअर,  pea या red gram भी कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण दलहनी फसल है जो खासकर भारत में बड़ी मात्रा में उगाई जाती है। इसकी दाल प्रोटीन से भरपूर होती है और हर घर के रसोई का हिस्सा है। किसान भाई इस फसल से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं क्योंकि इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है।

🧭 भारत में अरहर की खेती की स्थिति


भारत में अरहर की खेती खासकर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में होती है।

भारत विश्व में अरहर का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश है।


🧪 अरहर की खेती के लिए आवश्यक जलवायु


तापमान: 25°C से 35°C


वर्षा: 600–1000 मिमी


मौसम: यह खरीफ फसल है, लेकिन कुछ जगहों पर रबी में भी बोई जाती है।


सूरज की रोशनी: अधिक चाहिए, छांव में उत्पादन घटता है।

🌾 मिट्टी की उपयुक्तता


मिट्टी: दोमट, हल्की बलुई से लेकर भारी काली मिट्टी


pH स्तर: 6.0 से 7.5


जल निकासी: अच्छी होनी चाहिए


खराब मिट्टी में ना करें: जलभराव वाली मिट्टी अरहर को नुकसान पहुंचाती है।


🧬 अरहर की उन्नत किस्में



किस्म का नाम अवधि (दिन) विशेषताएँ


ICPL 87119 (Asha) 170-180 रोगरोधी, उच्च उत्पादन

UPAS 120 120-130 कम समय में तैयार

BDN-708 165-175 महाराष्ट्र में लोकप्रिय

T-21 180-190 अधिक उपज, अच्छी दाल गुणवत्ता

Pusa 9 160-170 रोग प्रतिरोधक


📅 बुआई का समय


क्षेत्र बुआई का समय


उत्तरी भारत जून के आखिरी सप्ताह से जुलाई के पहले सप्ताह तक

दक्षिण भारत जून की शुरुआत से अगस्त तक

🌱 बीज की मात्रा व उपचार


बीज दर: 12–15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर


बीज शोधन:


थायरम या कार्बेन्डाजिम से 2.5 ग्राम/किग्रा बीज


राइजोबियम कल्चर से उपचार करें (नाइट्रोजन फिक्सेशन के लिए)


🚜 खेत की तैयारी


1. पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें।


2. 2-3 बार हैरो से जुताई करें और पाटा लगाएं।


3. खेत समतल और खरपतवार मुक्त होना चाहिए।


4. नमी बनाए रखने के लिए खेत में मेड़बंदी करें।


📏 बुआई की दूरी


पंक्ति से पंक्ति की दूरी: 60 से 75 सेमी


पौधे से पौधे की दूरी: 20 से 25 सेमी


मशीन या हाथ से सीधी बुआई की जा सकती है।

🧫 उर्वरक प्रबंधन


उर्वरक मात्रा प्रति हेक्टेयर देने का समय


नाइट्रोजन (N) 20–25 किग्रा बुआई के समय

फॉस्फोरस (P₂O₅) 40–50 किग्रा बुआई के समय

जैविक खाद 8–10 टन खेत की तैयारी के समय


> ✅ अरहर एक दलहनी फसल है, जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को भी बांधती है, इसलिए ज्यादा नाइट्रोजन की जरूरत नहीं।


💧 सिंचाई व्यवस्था


बुआई के समय: हल्की सिंचाई


पहली फूल अवस्था: आवश्यक सिंचाई


फली बनने पर: 1 सिंचाई


ध्यान रखें: जलभराव न हो, वरना पौधे गल सकते हैं।


🌿 खरपतवार नियंत्रण


पहली निराई: 20-25 दिन बाद


दूसरी निराई: 45-50 दिन बाद


रासायनिक नियंत्रण: पेंडीमिथालिन @ 1 लीटर प्रति हेक्टेयर बुआई के तुरंत बाद छिड़काव करें।


🐛 रोग और कीट नियंत्रण


प्रमुख रोग:


रोग लक्षण समाधान


फ्यूजेरियम विल्ट पत्ते पीले होकर गिर जाते हैं कार्बेन्डाजिम का 0.2% घोल

लीफ स्पॉट पत्तियों पर भूरे धब्बे मैंकोजेब का छिड़काव

स्टेम बोरर तना अंदर से खोखला मोनोक्रोटोफास का छिड़काव


प्रमुख कीट:


कीट नियंत्रण


हेलिओथिस एन्विलोफॉस या इंडोक्साकार्ब का छिड़काव

पत्ती खाने वाले कीट नीम तेल या जैविक कीटनाशक उपयोग करें

🧮 उत्पादन क्षमता



सामान्य किस्में: 10–15 क्विंटल/हेक्टेयर


उन्नत किस्में: 20–25 क्विंटल/हेक्टेयर


उचित देखभाल से पैदावार दोगुनी हो सकती है।

💰 लागत और मुनाफा (प्रति हेक्टेयर)


खर्च का नाम अनुमानित राशि (INR)


बीज ₹1500 – ₹2000

खाद और दवाई ₹4000 – ₹5000

सिंचाई और मजदूरी ₹6000 – ₹8000

कुल लागत ₹12,000 – ₹15,000

उत्पादन (20 क्विंटल × ₹7000) ₹1,40,000

शुद्ध मुनाफा ₹1,25,000 तक

> 💡 मुनाफा क्षेत्र, मौसम और मंडी रेट पर निर्भर करता है।


🛒 बिक्री और मार्केटिंग


मंडी बिक्री: नजदीकी कृषि मंडियों में बेचें


FPO और Co-operative Society: सीधे अच्छे रेट मिल सकते हैं


सीधी बिक्री: थोक विक्रेताओं, दाल मिलों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से संपर्क करें

🌱 फसल चक्र (Crop Rotation)


अरहर के बाद गेहूं, मक्का, चना या सरसों की फसल ली जा सकती है।

इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है।

🧠 महत्वपूर्ण सुझाव


जैविक तरीके अपनाएं – नीम आधारित कीटनाशकों का प्रयोग करें।


समय-समय पर फसल का निरीक्षण करें।


कम पानी में भी अरहर अच्छी होती है – वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए बढ़िया विकल्प।

Writer by: smart kheti guide 

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