शनिवार, 4 अक्टूबर 2025

“चना की खेती: पूरी जानकारी – उत्पादन, किस्में, फायदे, नुकसान और उपयोग”


 चना की खेती: पूरी जानकारी – उत्पादन, किस्में, फायदे, नुकसान और उपयोग


परिचय


चना (Gram या Chickpea) भारत की सबसे महत्वपूर्ण दलहनी फसलों में से एक है। यह प्रोटीन से भरपूर होता है और गरीब आदमी का मांस (Poor Man’s Meat) भी कहा जाता है। चना न केवल दाल बनाने में बल्कि चने का बेसन, स्नैक्स, चना भुना हुआ और हरा चना सब्जी के रूप में भी खूब खाया जाता है।


खेती की दृष्टि से देखें तो चना एक रबी की फसल है, जो कम पानी में भी अच्छे उत्पादन देती है। यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने का भी काम करती है क्योंकि इसकी जड़ों में राइजोबियम बैक्टीरिया नाइट्रोजन फिक्स कर लेते हैं।


इस आर्टिकल में हम विस्तार से जानेंगे कि चना कहाँ और कैसे उगाया जाता है, भारत और दुनिया में इसकी कितनी किस्में हैं, इसके स्वास्थ्य लाभ व नुकसान क्या हैं और इसकी मार्केट में क्या मांग है।


1. भारत में चना उत्पादन की स्थिति


भारत चने का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। भारत में कुल दाल उत्पादन का लगभग 40% हिस्सा अकेले चने से आता है।


प्रमुख राज्य – मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और बिहार।


भारत में क्षेत्रफल – लगभग 100 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर चने की खेती होती है।


उत्पादन – भारत हर साल लगभग 11-12 मिलियन टन चना पैदा करता है।


निर्यात – भारत चने को बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, UAE और यूरोप के देशों में निर्यात करता है।



2. विश्व में चना उत्पादन



दुनिया में भारत के अलावा भी कई देश चना उत्पादन करते हैं।


प्रमुख देश – भारत, तुर्की, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, म्यांमार, इथियोपिया, मेक्सिको और ईरान।


भारत की हिस्सेदारी – अकेले भारत दुनिया का लगभग 70% चना पैदा करता है।


ऑस्ट्रेलिया – दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है।


3. चने की किस्में (Varieties)


चना मुख्यतः दो प्रकार का होता है –


1. काबुली चना (Kabuli Gram / White Chickpea)



बड़े आकार का और सफेद रंग का


दाल, स्नैक्स और निर्यात के लिए ज्यादा उपयोग


विदेशों में ज्यादा डिमांड



2. देशी चना (Desi Gram / Black Chickpea)



छोटे आकार का और भूरे या काले रंग का


भारत में सबसे ज्यादा बोया जाने वाला


दाल और बेसन के लिए मुख्य उपयोग


👉 भारत में विकसित कुछ लोकप्रिय किस्में –


JG 11, JG 130, JG 315 (मध्य प्रदेश)


ICCV 10, ICCV 92944 (ICRISAT)


Pusa 256, Pusa 362 (IARI दिल्ली)


4. चने की खेती कैसे करें



(क) जलवायु


ठंडी और शुष्क जलवायु चना उत्पादन के लिए सर्वोत्तम होती है।


तापमान – अंकुरण के लिए 20-25°C और विकास के लिए 20-30°C आदर्श है।



(ख) मिट्टी


अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त है।


pH 6 से 7.5 सबसे अच्छा होता है।



(ग) बुवाई का समय


उत्तर भारत में – अक्टूबर से नवंबर तक


दक्षिण भारत में – अक्टूबर से दिसंबर तक



(घ) बीज की मात्रा


देशी चना – 60-70 किलो/हेक्टेयर


काबुली चना – 100-120 किलो/हेक्टेयर



(ङ) बीज उपचार


फफूंदनाशी से बीज उपचार करें।


Rhizobium कल्चर से बीज का टीकाकरण करना लाभदायक होता है।



(च) खाद और उर्वरक


सामान्यतः 20-25 किलो नाइट्रोजन, 40-60 किलो फास्फोरस और 20 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर पर्याप्त है।


जिंक और सल्फर देने से उत्पादन बढ़ता है।



(छ) सिंचाई


चना एक कम पानी वाली फसल है।


सामान्यतः 2-3 सिंचाई पर्याप्त है –


1. फूल आने के समय



2. दाना भरने के समय





(ज) रोग और कीट नियंत्रण


प्रमुख रोग – उखटा, झुलसा, गलन रोग


कीट – चना की इल्ली, चना मटिया


नियंत्रण – फफूंदनाशी का छिड़काव, जैविक नियंत्रण, नीम का उपयोग


5. चने का उपयोग (Uses)



भोजन में – दाल, बेसन, भुना चना, छोले, हरा चना सब्जी


पशु चारे में – पत्तियाँ और भूसी


औद्योगिक उपयोग – बेसन, स्नैक्स, बेकरी आइटम, आटा


निर्यात में – काबुली चना


6. चना खाने के फायदे


1. प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत – शाकाहारी लोगों के लिए आदर्श।



2. फाइबर से भरपूर – पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है।



3. वजन घटाने में सहायक – लंबे समय तक भूख नहीं लगती।



4. हृदय रोग में लाभकारी – कोलेस्ट्रॉल कम करता है।



5. ब्लड शुगर कंट्रोल – डायबिटीज रोगियों के लिए उपयोगी।



6. हड्डियों को मजबूत करता है – आयरन, मैग्नीशियम और जिंक की भरपूर मात्रा।



7. चना खाने के नुकसान



अधिक मात्रा में खाने से गैस और अपच हो सकती है।


कच्चा चना ज्यादा खाने से पेट में दर्द हो सकता है।


किडनी स्टोन के रोगियों को सावधानी रखनी चाहिए।


रात को ज्यादा भिगोया चना खाने से पेट फूलने की समस्या हो सकती है।


8. मार्केट और लाभ



चने की मार्केट में हमेशा मांग रहती है।


देशी चना का उपयोग बेसन में होता है, जबकि काबुली चना निर्यात के लिए।


सामान्यतः 1 हेक्टेयर से 18-25 क्विंटल उपज हो जाती है।


लागत कम और मुनाफा अच्छा होने के कारण यह किसानों की पसंदीदा फसल है।


9. निष्कर्ष


चना खेती की दृष्टि से कम पानी और कम लागत वाली महत्वपूर्ण फसल है। यह न केवल किसानों के लिए फायदेमंद है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी एक सुपरफूड है। भारत में इसकी मांग हर समय बनी रहती है और निर्यात की संभावना भी बहुत ज्यादा है।

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