बुधवार, 23 जुलाई 2025

मूंगफली की खेती कैसे करें – पूरी जानकारी शुरू से अंत तक (2025 Guide)


 🌱 मूंगफली की खेती कैसे करें – पूरी जानकारी हिंदी में (Peanut Farming Guide in Hindi)


भारत में मूंगफली एक प्रमुख तिलहन फसल है, जिसे लोग खाने, तेल निकालने और पशु आहार के रूप में उपयोग करते हैं। इसकी खेती खासकर खरीफ के मौसम (जुलाई से अक्टूबर) में की जाती है। मूंगफली की खेती अगर वैज्ञानिक तरीके से की जाए तो कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।


आइए जानते हैं मूंगफली की खेती की पूरी प्रक्रिया – बीज से लेकर फसल की कटाई तक:

1️⃣ जलवायु और मिट्टी की आवश्यकता


☁️ जलवायु:


मूंगफली की खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु उपयुक्त होती है।


30°C से 35°C तापमान आदर्श रहता है।


ज्यादा बारिश या पानी जमा होने से पौधे सड़ सकते हैं।


🌍 मिट्टी:


हल्की दोमट, बलुई दोमट या लाल मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।


मिट्टी का pH 5.5 से 7.5 होना चाहिए।


खेत समतल और जल निकासी वाला हो।


2️⃣ खेत की तैयारी कैसे करें?
Kisan kheti ki tayyari krte huye 


खेत को 2-3 बार हल और पाटा चलाकर भुरभुरा बना लें।


जल निकासी की अच्छी व्यवस्था रखें।


अंतिम जुताई में 5-6 टन गोबर की खाद/एकड़ मिलाएं।


1 एकड़ के लिए 1.5 फुट चौड़ी और 5 मीटर लंबी बेड बनाएं।


3️⃣ बीज का चयन और बीज की बुवाई


🌰 उन्नत किस्में:


किस्म का नाम उत्पादन क्षमता विशेषता


TG-26 18-20 क्विंटल/एकड़ सूखा सहनशील

GG-20 22-24 क्विंटल/एकड़ जल्दी पकने वाली

JL-24 20-22 क्विंटल/एकड़ अधिक तेलयुक्त



🌱 बीज दर:


1 एकड़ में 35–40 किलो बीज की आवश्यकता होती है।



🌿 बीज उपचार:


थायरम या कार्बेन्डाजिम से 3 ग्राम/किलो बीज उपचार करें।



🌾 बुवाई का समय:

Kisan kheti me mungfali ki beej ko bote huye 


खरीफ मूंगफली: जून अंत से जुलाई मध्य तक


रबी मूंगफली (दक्षिण भारत): अक्टूबर से नवंबर



🧑‍🌾 बुवाई की विधि:


कतार से कतार की दूरी: 30-45 सेमी


पौधे से पौधे की दूरी: 10-15 सेमी


गहराई: 4-5 सेम

4️⃣ सिंचाई (Watering Schedule)
Kisan mungfali ki kheti ki sichayi krte huye 

खरीफ फसल बारिश पर निर्भर रहती है।

जरूरत पर हल्की सिंचाई करें, विशेष रूप से फूल निकलने और दाने बनने के समय।

ज्यादा पानी से नुकसान हो सकता है।

5️⃣ उर्वरक प्रबंधन

उर्वरक का नाम मात्रा (प्रति एकड़) समय


नत्रजन (N) 10-15 किलो बुवाई के समय

स्फुर (P) 30-40 किलो बुवाई के समय

पोटाश (K) 20 किलो बुवाई के समय

जिंक सल्फेट 10 किलो 1 बार छिड़काव


💡 टिप: जैविक खेती के लिए गोबर की खाद, नीम की खली और वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग करें।


6️⃣ खरपतवार नियंत्रण

बुवाई के 20–25 दिन बाद निराई-गुड़ाई जरूर करें।

Pendimethalin 30% EC का 1 लीटर प्रति एकड़ बुवाई के बाद छिड़काव करें।

7️⃣ रोग और कीट नियंत्रण

रोग/कीट लक्षण नियंत्रण उपाय


पत्ती झुलसा पत्तियां सूखना Mancozeb का छिड़काव

सफेद गिडार जड़ें खा जाना Chlorpyrifos 20EC

माहू कीट पत्तियों पर काले कीड़े नीम तेल या Imidacloprid


✅ जैविक उपाय:

नीम का तेल, लहसुन-अदरक का काढ़ा छिड़कें


फेरोमोन ट्रैप और पीला चिपकने वाला कार्ड लगाएं


8️⃣ कटाई और उत्पादन


🔪 कटाई कब करें?
Kisan mungfali ko harvesting krte huye 


पौधों के पत्ते पीले पड़ने लगें और अंदर की मूंगफली सख्त हो जाए तब कटाई करें।


बीज के 70-80% भाग पर जाल दिखाई देने लगे।


🧺 उत्पादन:

औसतन 15 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन संभव है।


💰 बाजार भाव:

मूंगफली का MSP ₹6,300 प्रति क्विंटल (सरकारी) तक होता है

तेल निकालकर बेचने से मुनाफा और ज्यादा होता है


📊 मूंगफली की खेती का लाभ (Profit Calculation):


खर्च का प्रकार अनुमानित खर्च (प्रति एकड़)


बीज ₹1,500 - ₹2,000

खाद व उर्वरक ₹2,000 - ₹3,000

दवा व कीटनाशक ₹1,500

मजदूरी व सिंचाई ₹3,000 - ₹4,000

कुल खर्च ₹8,000 - ₹10,000

उत्पादन (20 क्विंटल) ₹1,20,000 (₹6,000/qtl रेट)

कुल मुनाफा ₹1 लाख से अधिक


📌 निष्कर्ष:

मूंगफली की खेती एक कम लागत, ज्यादा मुनाफा देने वाली खेती है। अगर किसान समय पर बुवाई, सिंचाई, और रोग नियंत्रण पर ध्यान दें, तो वे अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं। साथ ही यह फसल तेल उत्पादन और निर्यात में भी उपयोगी है, जिससे इसका बाज़ार मूल्य हमेशा अच्छा रहता है।

Writer by: smart kheti guide 

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